गीता जयंती 2021 महत्व , गीता का उत्पत्ति, इतिहास और स्वाध्याय

गीता जयंती 2021 का महत्व गीता में जीवन का सार मिलता है, जिसे हम पढ़ कर सही राह पर चलने का प्रयास करते हैं। इसके महत्व को बनाए रखने के लिए सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म में गीता जयंती मनाई जाती है। आज हम आपको गीता जयंती किसे कहते हैं ? , गीता की उत्पत्ति, गीता जयंती कब मनाई जाती है , श्रीमद भगवत गीता जयंती स्वाध्याय, भगवत गीता का उद्देश्य और कब हुआ था गीता का वाचन , गीता जयंती कैसे मनाई जाती है ? इसके बारे में बताने वाला हु आप हमारे इस पोस्ट के साथ बने रहे.

गीता जयंती किसे कहते हैं ?

गीता जयंती : हिंदू धर्म यानी सनातन धर्म  के सबसे बड़े ग्रंथ के जन्मदिवस को गीता जयंती कहा जाता हैं।  भगवत गीता को सनातन धर्म में सबसे ऊपर स्थान पर रखा जाता है, इसे सबसे पवित्र ग्रंथ भी माना जाता है।  भगवत गीता स्वयं श्री भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध में सुनाई थी। अर्जुन जब कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने सगे सम्बन्धियों  को दुश्मन के रूप में देखकर विचलित हो गए थे और उसने शस्त्र उठाने से इनकार कर दिया था।  तब स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को मनुष्य धर्म एवं कर्म का उपदेश दिया था। यही उपदेश भगवत गीता में लिखा हुआ है जिसमें मनुष्य जाति के सभी धर्म एवं कर्मों को साथ  रखा गया है। 

गीता की उत्पत्ति 

गीता की उत्पत्ति कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ था कहा जाता है कि कलयुग में प्रारंभ के  महज 30 वर्ष पहले गीता का जन्म यानी उत्पत्ति हुआ ,  जिसे जन्म स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने नंदीघोष रथ के सारथी के रूप में दिया था।   गीता का जन्म आज से लगभग 5140 वर्ष पूर्व हुआ था यह अनुमान है। 

गीता जयंती कब मनाई जाती है 

जयंती को प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी  को मनाई जाती है यह जयंती भगवत गीता जयंती के रूप में  पूरे धूमधाम से भारतवर्ष सहित अन्य देशों में भी मनाया जाता है। इस जयंती को गीता महोत्सव के रूप में भी हम सभी जानते हैं। 

गीता जयंती 2021 : वर्ष 2021 में यह 14 दिसंबर को मनाया जाएगा 

श्रीमद भगवत गीता जयंती स्वाध्याय

भगवत गीता स्वाध्याय : भगवत गीता केवल सनातन सभ्यता को मार्गदर्शन नहीं देती।  यह जातिवाद से कहीं ऊपर मानवता का ज्ञान देती है। श्रीमद भगवत गीता के 18वें अध्याय में मनुष्य के सभी धर्म एवं कर्म का विवरण दिया गया है।  इस अध्याय में सतयुग से लेकर कलयुग तक मनुष्य के सारे कर्म एवं धर्म का ज्ञान है।   गीता के श्लोकों में मनुष्य के जाति का आधार छिपा हुआ है मनुष्य के क्या कर्म है? उनके क्या धर्म है?  इसका विस्तार स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुख से कुरुक्षेत्र की धरती पर अर्जुन के समक्ष किया था।  आज वही ज्ञान हमें गीता के पन्नों में लिखा हुआ मिलता है  यह सनातन धर्म की सबसे पवित्र और मानव जाति का उद्धार करने वाला ग्रंथ है। 

भगवत गीता का उद्देश्य और कब हुआ था गीता का वाचन

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भगवत गीता का उद्देश्य : माना जाता है कि महाभारत काल कुरुक्षेत्र  का वह भयावह युद्ध था , जिसमें भाई ने भाई के सामने शस्त्र को खड़ा किया। जिसे आज तक का सबसे बड़ा धर्म युद्ध कहा गया है। इस धर्म युद्ध के दौरान अर्जुन ने जब अपने दादा भाई गुरु एवं अपने परिजनों को अपने दुश्मन के रूप में देखा तो अर्जुन का धनुष उनकी हाथों से छूटने लगा,  उनके पैर कांपने लगे, और वह युद्ध करने के लिए अपने आप को असमर्थ पाया  यानी वे युद्ध करने से मना कर दिया। 

तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया  इस प्रकार गीता  की उत्पत्ति हुई। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को धर्म की सही राह यानी परिभाषा समझाइए और उसे धर्म को निभाने का बल प्रदान किए। अर्जुन के मन में उठे सभी प्रश्नों का उत्तर भगवान स्वयं अपने मुख से भागवत गीता के श्लोकों के माध्यम से दिए। 

गीता की उत्पत्ति मनुष्य को धर्म का सही अर्थ समझाने की दृष्टि से किया गया जब गीता का सार स्वयंभू श्री कृष्ण ने किए तभी कलयुग का प्रारंभ हो चुका था।   कलयुग का ऐसा दौर जिसमें गुरु एवं ईश्वर स्वयं धरती पर मौजूद नहीं हैं , जो भटकते अर्जुन को सही राह दिखा पायें । 

 ऐसे में गीता के उपदेश मनुष्य जाति को सही राह प्रशस्त करते हैं इसी कारण महाभारत काल में गीता की उत्पत्ति  छुई। सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें किसी ग्रंथ की जयंती को मनाई जाती है जिसका उद्देश्य मनुष्य में गीता के महत्व को जगाए रखना है।   कलयुग में गीता ही एक ऐसा ग्रंथ है जिसे मनुष्य को सही और गलत का बोध कराता है।  

 गीता जयंती कैसे मनाई जाती है ? 

  1. जयंती मनाने के लिए लोग इस दिन अपने घर में भगवत गीता का पाठ करते हैं। 
  2. देशभर के इस्कॉन मंदिर के साथ-साथ विदेशों में भी कृष्ण एवं गीता की पूजा की जाती है के साथ-साथ भजन कीर्तन एवं आरती भी की जाती है। 
  3.  बहुत सारे महा विद्वान इस दिन गीता का सार करते हैं साथी साथ कई वाद-विवाद का आयोजन भी होता है जिसके माध्यम से मनुष्य जीवन को इसका ज्ञान मिल पाता है.
  4.  जयंती के दिन कई लोग उपवास भी रखते हैं। 
  5.  इस दिन गीता के उपदेश को  पढ़ा जाता है साथ ही साथ इसे लोग इंटरनेट एवं अपने मोबाइल फोन में जी सुनते हैं। 

गीता जयंती हमेशा  मोक्षदा एकादशी के दिन आती है , इसी दिन भगवान विष्णु की पूजा भी होती हैं और साथ ही साथ भगवत गीता का पाठ किया जाता है जिससे मनुष्य को मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।  

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