शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है Mahshivratri का क्या महत्व है

आज बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक पर हम चर्चा करने वाले की शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि (Mahshivratri) का क्या महत्व है शिवरात्रि महीने का सबसे ज्यादा अंधेरा भरा दिन क्यों होता है महाशिवरात्रि Mahshivratri को हम जागृति की रात क्यों कहते हैं आज हम इन सब विषयों पर चर्चा करने वाले हैं तो आइए चलते हैं सबसे पहले शिवरात्रि (Shivratri) क्यों मनाई जाती है

maha shivratri hindu festival background with trishul symbol

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार नारद मुनि शिवलोक गए और वहां जाकर उन्होंने वैष्णव में श्रेष्ठ श्री शिव जी की या का कर गुणगान करना शुरू कर दिया कि आप तो भगवान श्री कृष्ण के सबसे प्रिय हैं आपका उनसे कोई मतभेद नहीं है आप और वह एक ही है आप जीव जंतुओं को हर तरह से कल्याण कर सकते हैं यहां तक कि कृष्ण प्रेम भी दे सकते हैं अपनी महिमा सुनकर श्री शिव जी महाराज बड़ी विनम्रता से नारद जी से कहा मैं तो कृष्ण का एक छोटा सा सेवक हूं यह तो उनकी कृपा है कि वह अपनी सेवाओं में मुझे प्रदान करते हैं।

श्रीमद भगवत गीता के प्रसंग में एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिलकर भगवान के निर्देशानुसार समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत पाया जा सके परंतु उस समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष निकला वह भी इतना विषैला था कि उससे समस्त संसार जगत प्रीत हो गया था देवी देवताओं में हाहाकार मच गया था उस विषैले पदार्थ को सुनते सुनते ही सब लोग विशुद्ध हो गए थे तब भगवान ने अपनी शक्ति शक्ति से ठीक किया देवों ने जब विश्व से बचने का उपाय पूछा तो भगवान ने कहा कि अगर आप सभी भगवान शिव की आराधना प्रार्थना करेंगे तो वह हल निकाल देंगे श्री शिव जी महाराज ने देवताओं की प्रार्थना से प्रसन्न होकर उस विषय लेविस को पीने का निर्णय किया और वाह विषय ले विश्व को दी गई किंतु उसको निकला नहीं और उस विष को अपने गले में ही रोक लिया जिसके प्रभाव से उनका गला नीला हो गया तब उसे नीलकंठ कहने लगे इस अद्भुत अलौकिक घटना के याद में ही Mahshivratri मनाई जाती है।

हर चंद्रमा का 14 दिन अथवा जिसे हम अमावस्या से पूर्व का एक दिन शिवरात्रि के नाम से जानते हैं एक कैलेंडर वर्ष के आने वाले सभी शिवरात्रि ओं में से महाशिवरात्रि को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है जो फरवरी मार्च माह में आता है इस रात ग्रह का उत्तरी गोलार्ध इस प्रकार अवस्थित होता है कि मनुष्य के भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर जाती या एक ऐसा दिन है जब प्रकृति मनुष्य को उसके अध्यात्मिक शिखर तक जाने में मदद करते हैं इस समय का उपयोग करने के लिए इस परंपरा में हम एक उत्सव मनाते हैं जो पूरी रात चलता है जिसे हम महाशिवरात्रि (Mahshivratri) के रूप में भी जानते हैं पूरी रात मनाए जाने वाले इस उत्सव में इसका विशेष ध्यान रखा जाता है कि उर्जा ओके पाकिस्तान प्रवाह को मरने का पूरा अवसर मिले आप अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए निरंतर जागते रहते हैं।

महाशिवरात्रि का महत्व

भारत की संस्कृति में किसी किसी समय 1 वर्ष में 365 व्यवहार हुआ करते थे मतलब यह कि हर दिन भारत की संस्कृति के अनुसार एक त्यौहार का भी होता था साल के प्रत्येक दिन कोई न कोई उत्सव मनाने का बहाना लोग खोजते रहते थे 365 तलवारों विविध कारणों तथा जीवन के विभिन्न उद्देश्य से जुड़े हुए थे इन ऐतिहासिक घटनाओं मैं जीवन की कुछ अवस्थाओं जैसे फसल की बुवाई रोपाई कटाई आदि को जोड़ा गया था हर प्रस्तुति के लिए हमारे पास एक त्यौहार था परंतु महाशिवरात्रि का तो महत्त्व ही कुछ और है भगवान शिव ने पूरे सृष्टि को बचाने के लिए विष को अपने गले में उतार लिया था यही कारण है कि भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है और महाशिवरात्रि के दिन हम महान उत्सव मनाते हैं. Mahshivratri 2021 इसका महत्व भी सबसे अलग है।

महाशिवरात्रि (Mahshivratri) का आध्यात्मिक महत्व


महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले सभी साधकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण था यह महा रात्रि भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में भी हम मनाते हैं।
वैसे तो महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व पौराणिक कथाओं में भी है परंतु उन्हें छोड़ दे तो योगिक परंपराओं में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि इसमें अध्यात्मिक साधक के लिए बहुत ही संभावनाएं मौजूद होती हैं आधुनिक विज्ञान उनके चरणों से होते हुए आज उस बिंदु पर आ जाता है जहां प्रमाण देखने को मिलता है आप जिसे जीवन के रूप में जानते हैं पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं उसे आप ब्रह्मांड और तारामंडल के रूप में जानते हैं वह सब एक केवल एक ऊर्जा जो स्वयं को लाखों-करोड़ों रूप में प्रकट करती है यह वैज्ञानिक तथ्य प्रत्येक योगी के लिए एक अनुभव से जा सकते हैं योगी शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसने अस्तित्व की एकात्मता को जान लिया है जब मैं कहता हूं योग तो मैं किसी विशेष अभ्यास का यंत्र की बात नहीं कर रहा इस असीम विस्तार को तथा अस्तित्व कोई का भाव को जानने की सारी चा योग है महाशिवरात्रि की रात व्यक्ति को इसी का अनुभव पाने का अवसर देती है।

शिवरात्रि महीने का सबसे अंधेरा होता है

शिवरात्रि मां का सबसे अंधकार पूर्ण दिवस होता है प्रत्येक माह शिवरात्रि का उत्सव तथा महा शिवरात्रि का उत्सव मनाने का अवसर प्राप्त होता है मानव हम अंधकार का उत्सव मना रहे परंतु जब आप भगवान शिव की आराधना करते हैं तो आपको व अंधकार मिट सा जाता है और हम इस उत्सव को इतने हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं कि अंधेरा हमारे मस्तिष्क से चला जाता है और भगवान शिव हमारे हृदय में प्रवेश कर जाते हैं ऐसा महसूस होने लगता है क्यों हमारे अस्तित्व और सभी के सृजन करने वालों में से एक है इस दिन का अंधेरा भी मानव छुप सा जाता है और हम इसे इतने हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं कि वह अंधेरा हमारे जीवन से निकल जाता है।

महाशिवरात्रि को हम जागृति की रात भी कहते हैं

महाशिवरात्रि को हम जागृति की रात भी कहते हैं मतलब यह कि इस दिन भगवान शिव शंकर के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हम रात भर बिना कुछ करे बिना कुछ थके भगवान शिव की आराधना करते हैं और साथ ही साथ जागरण कर भगवान की प्रार्थना करते रहते हैं जिससे हमारी सभी दुख दरिद्रता हमारे मन से निकल जाए ऐसी प्रार्थना करते हुए भगवान शिव की आराधना करते इस दिन बहुत सारे लोग पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना एवं उसकी प्रार्थना करते रहते हैं ताकि उन्हें उनके मन में छुपे सभी क्रोध भाव खत्म हो सके।

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