भारत सरकार ने Tweeter को अंतिम चेतावनी(नोटिस) ने जारी की

भारत सरकार ने ट्विटर Tweeter को अंतिम चेतावनी (नोटिस) जारी की

भारत सरकार ने ट्विटर को अंतिम चेतावनी (नोटिस) जारी की और कहा है की अगर यदि ट्विटर इस बार लॉ ऑफ लैंड मानने से मना करता है तो आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत दी गई इम्यूनिटी वापस ले ली जाएगी और ट्विटर आईटी अधिनियम और भारत के अन्य दंड कानूनों के अनुसार परिणामों के लिए उत्तरदायी होगा।

ट्वीटर को अंतिम चेतावनी

आईटी एक्ट 2000 की धारा 79 क्या कहती है?

मध्यस्थ की जवाबदेही (ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म की जवाबदेही):

आईटी अधिनियम 2000 की धारा 79 यह स्पष्ट करती है कि “एक मध्यस्थ उसके द्वारा होस्ट या उपलब्ध कराई जाने वाली किसी तीसरे पक्ष की जानकारी, डेटा, या संचार लिंक के लिये उत्तरदायी नहीं होगा”।

तृतीय पक्ष की जानकारी से आशय एक नेटवर्क सेवा प्रदाता द्वारा मध्यस्थ के रूप में उसकी क्षमता से संबंधित किसी जानकारी से है।

यह मध्यस्थों (जैसे इंटरनेट और डेटा सेवा प्रदाताओं और वेबसाइट होस्टिंग करने वालों) को उन सामग्री के लिये उत्तरदायी होने से बचाता है जो उपयोगकर्त्ता द्वारा पोस्ट या जेनरेट की जाती है।

धारा 79 के माध्यम से “नोटिस और हटाए जाने” (Notice and Take Down) के प्रावधान की अवधारणा को लागू किया गया है।

इसके अनुसार, यदि कोई मध्यस्थ (ट्विटर फेसबुक व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म) उसके द्वारा नियंत्रित कंप्यूटर संसाधन में उपस्थित या उससे जुड़े किसी डेटा, सूचना या संचार लिंक का प्रयोग एक गैर-कानूनी कार्य किये जाने की वास्तविक जानकारी प्राप्त करने या सूचित किये जाने के बाद भी ऐसे लिंक को शीघ्रता से अक्षम करने या उस सामग्री तक पहुँच हटाने में विफल होता है तो उस स्थिति में वह मध्यस्थ अपनी प्रतिरक्षा खो देगा।

सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह धारा किसी सोशल मीडिया उपयोगकर्ता द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म का दुरुपयोग करके आपत्तिजनक कंटेंट शेयर करने पर सोशल मीडिया कम्पनियों को कानूनी कार्यवाही से बाहर रखने की इम्यूनिटी प्रदान करती है।

अर्थात यूजर द्वारा पोस्ट/शेयर किये गये आपत्तिजनक कंटेंट का जिम्मेदार सोशल मीडिया कम्पनी को नहीं माना जाएगा और एफआईआर व कोर्ट केस में वादी नहीं बनाया जा सकेगा।

साथ ही यह प्रावधान भी करती है की सरकार द्वारा बताये गये कंटेंट को हटाने में अगर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विफल होता है तो यह इम्यूनिटी हटाई जा सकती है और फिर एफआईआर व कोर्ट केस में सोशल मीडिया कम्पनियों को भी वादी बनाया जा सकता है।

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