होली Holi क्यों और कब मनाते हैं HOli कैसे मनाए

होली का त्योहार हम कब मनाते हैं क्यों मनाते हैं यह लगभग लोगों को पता होगा कुछ लोगों को पता भी नहीं होगा जैसे हम होली का नाम सुनते हैं हमारे मन में एक ऐसा उल्लास भर उठता है कि मानो यह त्यौहार हमारे लिए अनेक खुशियां लेकर आया है होली का त्यौहार है जिसमें बच्चे से लेकर बूढ़े तक बच्चियों से लेकर महिलाओं तक इस त्यौहार को मनाने में बिना भेदभाव किए इसे हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं हमारा भारत देश जैसे विश्व में इस त्यौहार को लेकर अनेक चर्चाएं भी होती है लोग कहते हैं कि यह त्यौहार लोगों में आपसी भेदभाव को बुलाकर मनाते हैं यह त्यौहार हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे सभी धर्म के लोग प्रेम पूर्वक मनाते हैं इसके वजह से आपसी प्रेम की प्रगाढ़ता भी बढ़ती है और एक दूसरे को निकट भी लाती है हमारे देश में जितने भी त्योहार मनाए जाते हैं उसमें एक पौराणिक कथा और छुपी होती है होली क्यों मनाते हैं इस पर भी बहुत सारी कहानियां आज हम आपको उन कहानियों में से कोई कहानियों का उल्लेख करते हुए हम आपको बताएंगे कि होली क्यों मनाई जाती है तो सबसे पहले हम जानते हैं की होली होता क्या है

होली क्या होता है – what is Holi in Hindi

होली नाम सुनते ही ऐसा लगता है मानव मन खुशी से मर चल जाता है यह दिन बड़ा ही शुभ दिन माना जाता है हिंदू धर्म के लिए यह पर बड़ा ही महत्वपूर्ण रखता है या पर्व हम हर वर्ष वसंत ऋतु के समय फागुन जिसे हम अंग्रेजी में मार्च के महीने में का शक्ति उस दिन पूर्णिमा को मनाया जाता है और यह पर्व हमें इतनी खुशियां देता है मानो सारी खुशियां इसी शहरों में मिल जाता है यह पसंद का त्यौहार के रूप में भी हम मनाते हैं यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार फागुन माह में मनाया जाता है और इसी दिन से माना जाता है कि गर्मी की शुरुआत होती है इस वर्ष भारत में 28 मार्च को होली हर जगह खेली जाएगी होली का यह उत्सव लोग एक दूसरे से गले मिलकर एक दूसरे को रंग अबीर लगाकर पूरी प्रकृति वातावरण में मनाया जाता है इस पर्व में सुख दुख को भुलाकर एक-दूसरे से मिलते हैं यह माना जाता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होली को मनाया जाता है.

होली पर्व को क्यों मनाया जाता है

अब हम सभी को जाना चाहिए कि होली पर्व को क्यों मनाया जाता है जैसा कि हम जानते हैं भारत के सभी त्योहारों के पीछे एक पौराणिक कहानी जुड़ी हुई होती है उसी पौराणिक कहानियों में से एक कहानी प्रहलाद और उनकी भक्ति को माना जाता है प्राचीन कालीन में हिरण कश्यप नाम का एक राजा बहुत ही बलवान गुरूर हुआ करता था जिसे ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि अगर कोई इंसान या उसको जानवर कभी भी मार नहीं सकता ना कोई अस्त्र से ना कोई शस्त्र से ना कोई आकाश से ना कोई पताल से कोई भी उनको मार नहीं सकता था इसी वरदान के वजह से हिरण कश्यप बहुत घमंडी हो गया वह अपने आपको भगवान से भी ऊपर समझने लगा और अपने राज्य में अत्याचार करने लगा और वह भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी को मना करने का आदेश दे दिया क्योंकि उसके छोटे भाई को भगवान विष्णु ने मारा था उसी का बदला लेने के लिए उन्होंने पूरे राज्य में यह आदेश जारी कर दिया कि जो भी विष्णु का पूजा करेगा मैं उसे मार दूंगा परंतु हिरण कश्यप का 1 पुत्र था जिसका नाम प्रह्लाद वह एक असुर का पुत्र होते हुए भी वह भगवान विष्णु की पूजा आराधना में डूबा रहता था बिना किसी ख्वाब बिना किसी डर से वह भगवान श्री विष्णु श्री हरि को अपना सब कुछ मानता था जब यह बात हिरण कश्यप को पता चला तो उसने अपने पुत्र को कहा कि तुम भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ दो नहीं तो तुम्हें मृत्युदंड दूंगा परंतु प्रह्लाद तो भगवान श्री विष्णु हरि की भक्ति में इतनी तरह से डूबा हुआ था कि उसे यह करना मंजूर ना हुआ तभी क्रोध में आकर हिरण कश्यप ने अपने पुत्र को मृत्युदंड देने का फैसला लिया और वह अपनी बहन होलिका की सहायता मांगी होलिका को भी भगवान शिव का एक वरदान प्राप्त था जिसमें उसे एक वस्त्र मिला था वस्त्र का विशेष चमत्कार था कि जब वह वस्त्र पहन कर होली का आग में भी बैठ जाए तो उससे आंख भी नहीं चला सकता हिरण कश्यप ने षड्यंत्र रचा और होलिका को यह आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ जाए आग में होलिका जल नहीं सकती थी क्योंकि उसे वरदान मिला था और उसका पुत्र आसानी से उस आग में जलकर भस्म हो जाएगा जिससे सबको यह सबक मिलेगा कि अगर हमारी बात कोई प्रजा नहीं सुनती है या नहीं मानती है तो उसे भी उसके पुत्र के जैसा मृत्यु दंड दिया जाएगा।

परंतु जब होली का प्रह्लाद को लेकर आग में बैठी तब तो भगवान विष्णु का जाप प्रह्लाद निरंतर करते रह रही थी और आप जानते हैं कि भगवान भक्तों की रक्षा करने के लिए अपना कर्तव्य किस प्रकार से निर्वहन करते हैं इसलिए उन्होंने भी एक षड्यंत्र रचा और ऐसा तूफान आया जिससे कि होलिका को जो वस्त्र भगवान शिव को वरदान में मिला वह वस्त्र उड़ गया और आज से ना जलने वाले वरदान पाने वाले होली का भस्म हो गई पूरी दूसरी ओर भक्त प्रह्लाद को अग्नि देव ने छुआ तक नहीं क्योंकि भक्त प्रह्लाद पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद था इस घटना के बाद से लेकर अब तक हिंदू धर्म के लोग इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखते हैं और इस दिन से होली उत्सव की शुरुआत की गई और इस दिन को मनाने के लिए लोग रंगों से होली खेलते हैं और हम यह भी देखते हैं कि होली से ठीक 1 दिन पहले होलिका का धन होता है जिसमें लकड़ी गोबर घास इत्यादि देकर उसकी चारों ओर परिक्रमा कर यह वचन लेते हैं कि हम भी आज से बुराई को छोड़कर अच्छाई करने का प्रयास करेंगे और घूम घूम कर आग जलाते हैं जिसे हम होलिका दहन भी कहते हैं।

होली मनाने का का इतिहास

जैसा कि हम जानते हैं होली हिंदू की लिए एक सांस्कृतिक धार्मिक और परंपरागत चली आ रही त्योहारों में से एक त्यौहार मानी जाती है होली शब्द का उत्पन्न होलिका से हुआ है होली का त्योहार विशेष रूप से भारत यानी आर्यवर्त के लोगों के द्वारा मनाया जाता जिसके पीछे बड़ा कारण यह होली रंगों का त्योहार नहीं बल्कि हमारे बीच भाईचारे को बनाने हेतु भाईचारे की भावना रखने के लिए इस त्यौहार को हम बड़े धूमधाम से मनाते हैं होली पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाने जाने वाला एक बड़ा त्यौहार है इसे कई सदियों से मनाया जाता रहा है हम पहले की होली की बात करें तब यह त्यौहार विवाहित महिलाओं द्वारा पूर्णिमा की पूजा द्वारा उनके परिवार के अच्छे एवं स्वस्थ हेतु मनाया जाता था।
यह त्यौहार भारत के सभी प्रदेशों यानी प्रांतों में मनाया जाने वाला त्यौहार है यह त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है अलग-अलग प्रदेशों व प्रांतों मैं वहां की संस्कृति रिती नीति अनुसार मनाया जाता है यह त्यौहार हमें जीवन में सभी से मिलजुल कर रहने हेतु प्रेरणा देता है।

होली के आधुनिक रंग

होली 1 रंगों का त्योहार है इसे हंसी खुशी का त्यौहार भी कहते हैं लेकिन होली के भी अनेक रूप देखने को मिलते हैं प्राकृतिक रंगों के स्थान पर रासायनिक रंगों का प्रचलन भांग ठंडाई की जगह नशे बाजी और लोक संगीत की जगह फिल्मी गानों का प्रचलन इसके कुछ आधुनिक रूप है लेकिन इससे होली पर गाए बजाए जाने वाले ढोल मंजीरा फाग धमार चैती और ठुमरी की शान में कमी नहीं आती लोग आज भी परंपरागत संगीत को गाते हैं और उसकी समझ भी रखते हैं पर्यावरण के प्रति सचेत भी रहने वाले बहुत सारे लोग होली को प्राकृतिक रंगों से खेलने की परंपरा बनाएं और संस्थाएं चंदन गुलाब जल टेसू के फलों से बना हुआ रंग तथा प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परंपरा बनाए जाते हैं इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान भी दे रहे हैं रासायनिक रंगों के कुप्रभाव के जानकारी होने के बाद भी लोग स्वयं ही प्राकृतिक रंगों की ओर लौट रहे होली की लोकप्रियता का विकसित होता हुआ अंतरराष्ट्रीय रूप भी आकार लेने लगा है क्योंकि यह त्यौहार भारत नहीं अपितु पूरे विश्व में मनाए जाने वाला एक बार बनता जा रहा है।

होली मनाने के वैज्ञानिक कारण

होली का जो त्यौहार है यह केवल मौज-मस्ती सामुदायिक सद्भाव और मेल बीमा मिलाप का त्यौहार नहीं बल्कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी है जो ना कि केवल पर्यावरण को बल्कि माननीय सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमंद है वैज्ञानिकों का मानना है कि हमें अपने पूर्वजों को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद उचित समय पर होली त्यौहार मनाने का निर्णय लिया होगा परंतु आज जिस प्रकार से अपनी मौज मस्ती और अपनी लालसा का उपयोग हम इस त्यौहार में करते हैं वह गलत क्योंकि लोग इस त्यौहार मनाने के पीछे वैज्ञानिक कारणों से अनजान भी तो आइए जानते हैं किस के वैज्ञानिक कारण कौन-कौन से हैं

Holi से मौसम के बदलाव से रक्षा

होली का त्यौहार साल के ऐसे समय पर आता है जब मौसम में विशेष बदलाव होता है यानी ठंड के मौसम से गर्मी के मौसम में आना जिसके कारण हमारे शरीर में आलस थकान सुस्ती महसूस करना प्राकृतिक है शरीर की सुस्ती को भगाने के लिए लोग फागुन के इस माह में ना केवल जोर से गाते हैं बल्कि जोर जोर से बोलते भी हैं जैसे होली आई है होली है सारा रारा होली है इस मौसम में बजाया जाने वाला संगीत भी बेहद तेज होता है यह सभी बातें मानवीय शरीर को एक नई शक्ति प्रदान करता है इसके अतिरिक्त रंग और अगर शुद्ध रूप से शरीर पर डाला जाता है तो इसका एक अनोखा प्रभाव भी होता है

सुंदरता में निखार और शरीर की तंदुरुस्ती


होली के दिन शरीर पर गुलाल या अबीर त्वचा को उत्तेजित करते हैं अगर वह गुलाल और अबीर शुद्ध हो तो और शरीर के आयन मंडल को मजबूती प्रदान करते हैं साथ ही साथ स्वास्थ्य को बेहतर करते हैं और उसकी सुंदरता पर भी निखार लाने का कार्य करते हैं।

पर्यावरण की सुरक्षा

जैसे ही ठंड यानी शरद ऋतु की समाप्ति और गर्मी यानी बसंत ऋतु के आगमन का यह काल पर्यावरण और शरीर में बैक्टीरिया की विधि को बढ़ा देता है लेकिन जब होलिका जलाई जाती है तो उसे करीब 145 डिग्री फॉरेनहाइट तक तापमान बढ़ता है परंपरा के अनुसार जब लोग जलती होलिका की परिक्रमा करते हैं तो होली का से निकलता हुआ था शरीर और आसपास के पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है और इस प्रकार यह शरीर तथा पर्यावरण को स्वच्छ करने का कार्य भी करता है। भारत के दक्षिण भाग में जिस प्रकार से होली मनाई जाती है उससे या अच्छे स्वास्थ्य को भी प्रोत्साहन मिलता है होलिका दहन के बाद दक्षिण भारत के लोग होलिका की बुझी आग की राख को माथे पर विभूति के तौर पर लगाते हैं और स्वास्थ्य के लिए वित्त चंदन तथा हरि को पढ़ो और आम के वृक्ष के बोरों को मिलाकर उसका सेवन निरंतर करते रहते हैं झारखंड और बिहार में के लोग भी इसे अपने माथे पर भी लगाते हैं।
स्वच्छता पर ध्यान

होली आते ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई भी करते हैं जैसे धूल गर्द मच्छरों और अन्य कीटनाशक का सफाया हो जाता है और घर साफ सुथरा आमतौर पर कहे तो हम उस अवस्था में अपने आपको सुखद एहसास देने के साथ साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी सृजन होता है।

प्राकृतिक रंग को कैसे बनाएं

प्राकृतिक रंग बनाने हेतु आप घर में भी होली के लिए सुंदर रंग बना सकते हैं इसके लिए सर्वप्रथम आपको पलाश के फूलों को रात भर पानी में भिगोकर बहुत ही सुंदर नारंगी रंग बना सकते हैं कहते हैं भगवान कृष्ण भी देशों के फलों से होली खेलते थे टेसू यानी पलाश के फूलों के रंग को होली का पारंपरिक रंग माना जाता था हरसिंगार के फूलों को पानी में भिगोकर भी नारंगी रंग बनाया जा सकता है तो आइए जानते हैं हम कैसे अपने घर में होली के लिए सुंदर रंग बना सकते हैं
तो सर्वप्रथम एक चुटकी चंदन पाउडर को 1 लीटर पानी में भिगो देने से नारंगी रंग बनता है

आज के युवा पीढ़ी होली मनाने के लिए रोमांचित रहते हैं परंतु बिना रंग के होली की कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन मुश्किल यह है कि इन रंगों में जो केमिकल पाए जाते हैं वह हमारी त्वचा और आंखों और शरीर के लिए हानिकारक होता है हम आपको प्राकृतिक रंग बनाने की विधि बता रहे हैं जिसे आप बनाकर होली में प्रारंभिक तरीके से आनंद ले सकते हैं

  1. सूखे लाल चंदन को आप लाल गुलाल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं यह सूखा लाल रंग का पाउडर होता है और त्वचा के लिए अच्छा एवं गुणकारी होता है।
  2. जसवंती के फूलों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें और इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए आटा मिला दे सिंदुरिया के बीच लाल रंग के होते हैं इनसे आप सूखा वादी लाल लाल रंग बना सकते हैं।
  3. दो चम्मच लाल चंदन पाउडर को 5 लीटर पानी में डालकर उबालें इसमें 20 लीटर पानी और डालें अनार के छिलकों को पानी में उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है।
  4. बुरांश के फलों को रात भर पानी में भिगोकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है लेकिन यह फूल सिर्फ पहाड़ी इलाकों में उपलब्ध होता है या पाया जाता है।
  5. सूखे मेहंदी पाउडर को आप हरे रंग की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं सुखी लगाने पर इसे यूं ही हाथ से साफ किया जा सकता है गीली मेहंदी से त्वचा पर रंग ना जाने का डर रहता है इसलिए इसे बालों पर लगाने से ज्यादा फायदा होता है इसे बेझिझक किसी के बालों पर भी लगा सकते हैं।
  6. गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर महीन पाउडर कर इसे आप हरे रंग की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
  7. दो चम्मच मेहंदी का पाउडर को 1 लीटर पानी में मिलाकर अच्छी तरह से हिला कर पालक धनिया और पुदीने की पत्तियों को पेस्ट पानी में घोलकर जिला हरा रंग बनाया जा सकता है।
  8. एक चम्मच हल्दी को 2 लीटर पानी में मिलाकर अच्छे से मिला ले गाड़ी पीले रंग के लिए आप इसे बाल भी सकते हैं 50 गेंदे के फूलों को 2 लीटर पानी में मिलाकर उबाल लें वह रात भर भेजने थे सुबह तक बहुत ही खूबसूरत पीला रंग तैयार हो जाएगा।
  9. जामुन को बारीक पीस लें और पानी मिला लें इससे बहुत ही सुंदर नीला रंग तैयार हो जाएगा। तो दोस्तों यह थी प्राकृतिक तरीके से प्राकृतिक रंग बनाने का एक तरीका जो आपके समक्ष रखा यह आपको विचार करना है कि आप रासायनिक केमिकल युक्त रंग लगाने हैं या आपको प्राकृतिक रंग बनाकर अपनी त्वचा और संस्कृति से खिलवाड़ ना करते हुए होली का त्योहार मनाना है तो आइए आज हम संकल्प लेते हैं कि 2020 की होली हम प्राकृतिक रंगों से मनाएंगे।

प्राकृतिक रंगों से लाभ

प्राकृतिक रंगों से हमारे शरीर को अनेक लाभ मिलते हैं हल्दी पलाश गेंदा आमला हिना जामुन चंदन आदि प्राकृतिक रंगों से होली खेलने से हमारे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता हम यू कह सकते हैं कि जो गर्मी का ताप होता है उसे सहन करने की शक्ति प्राप्त होती है तो आइए इस बार हम 2020 की होली वैदिक होली मनाने का प्रयास करते हैं और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर इस होली में हम अपने मित्रों और अपने परिवार के साथ खेलने का संकल्प करते हैं।

केमिकल के रंगों के दुष्प्रभाव

आज के युग में केमिकल का एक बड़ा खेत रंगों में अभी रूम में उपयोग होने लगा है जो हमारे शरीर के अनेक हिस्सों को कमजोर बना देता है जैसे काला रंग यह रंग केमिकल से लीड ऑक्साइड से बनता है जो हमारे गुर्दे के रोग दिमाग के कमजोरी को उत्पन्न करता है उसी तरह हरा रंग कॉपर सल्फेट से बनता है जिससे आंखों की सृजन एवं आंख से अंधा बनाने के लिए यह कारगर है लाल रंग मरकरी सल्फाइड जिसे केमिकल से बनाया जाता है उसे लगाने से हमें स्किन कैंसर हो सकता है इसीलिए आज हम आपसे निवेदन करते हैं कि 2021 की होली हम सभी को प्राकृतिक रंगों से अविरों से खेलनी चाहिए।

होली के रंग को अपने शरीर से कैसे छुड़ाएं

होली के दिन जब आप रंगों से खेलना चाहते हैं तब होली के दिन सुबह में नारियल या सरसों का तेल लगा ले अगर आप को तेल लगाना अच्छा नहीं लगता तो कोई लोशन भी लगा सकते हैं इसके उपयोग के बाद आप जितना और रंग लगाना चाहे कोई फर्क नहीं पड़ेगा आपकी त्वचा पर पक्का रंग नहीं चल पाएगा।

  1. होली खेलते समय अपने आंखों के आसपास पलकों में तेल का सेवन करें इससे आपको आंखों को रंगों से बचाव करने में मदद मिलता है।
  2. अगर आपकी आंखों में सूखा रंग चला गया हो तो आंखों को पानी से धोएं बार-बार धोने से आंखों में कोई परेशानी नहीं होगी इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि आप आंखों को मसले नहीं इसमें आंखों में जलन होगी साथ ही साथ आंख खराब होने का डर भी रहेगा
  3. रंग खेलने के पश्चात आंखों में गुलाब जल डालकर आराम कर ले इससे आपकी आंखों का जलन भी ठीक हो जाएगा।
  4. होली खेलने के पश्चात स्नान करने से 1 घंटा पूर्व मुल्तानी मिट्टी को भिगो दें नहाते समय रंगी त्वचा पर मिट्टी को लगाएं और थोड़ी देर सूखने दें उसके बाद आप धोए या शरीर का रंग छुड़ाने में आपकी सहायता करता है।
  5. बेसन मीठा तेल और मलाई इन तीनों की जरूरत के अनुसार लेकर हल्का सा पानी मिलाकर इसका गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें इससे चेहरे और हाथों पर लगाएं और सूखने के बाद हाथ से मसलकर निकाल दें इससे आपकी त्वचा का रंग जो आपके चेहरे पर लगा है वह आसानी से छूट जाएगा।
  6. अब जानते हैं जब आपके शरीर पर पहुंच गया रंग चढ़ा है और उतरने का नाम ही नहीं ले रहा है तो आप की रोशनी में एक कपड़ा भिगोकर कलर वाले स्थान पर हल्के हाथ से मसले इससे आपके शरीर पर लगा रंग जल्द ही छूमंतर हो जाएगा और रंग हटकर सामान्य हो जाएगा।

तो यह थी होली में जब आपके शरीर पर रंग लग जाता है तो आप उसको कैसे चला सकते हैं इसकी विधि तो यह विधि आपको कैसी लगी आप हमें कमेंट कर अवश्य बताएं।

होली पर शायरी हिंदी में

हम जानते हैं कि आज का युग आधुनिक युग हो गया है और हम हर एक त्यौहार पर अपने मित्रों और परिवारों को शेरो शायरी wish भेजते रहते हैं एक जमाना हुआ करता था जब हम पोस्टल सर्विस डाक व्यवस्था की उपयोग कर तथा ईमेल आईडी का उपयोग कर हम ऐसे शुभकामनाएं पत्र भेजा करते थे आज के टेक्नोलॉजी आगे निकल चुकी है आज बहुत सारे एप्लीकेशन जैसे व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टाग्राम टेलीग्राम इत्यादि मौजूद है जिसमें हम आसानी से शुभकामनाएं फोटो एवं शेरो शायरी भेजते हैं.
तो आइए जानते हैं आज कुछ होली पर शेरो शायरी( Holi shayri in Hindi)

Holi 2021 शायरी

दिल में उठा तूफान भेजा है
आपसे ना मिल पाने का मलाल भेजा है
वक़्त मिले तो तोड़ा सा याद करना..
आपके इस दोस्त ने होली का राम राम भेजा है

गुलजार खिले हो परियों के, और मंजिल की तैयारी हो.
कपड़ों पर रंग के छींटों से खुशरंग अजब गुलकारी हो.

होली का गुलाल हो रंगों की बहार हो .
गुझिया की मिठास हो एक बात खास हो .
सबके दिल में प्यार हो. 
होली की एडवांस बधाईयाँ 

वो गुलाल की ठंडक वो शाम की रोनक
वो लोगों का गाना वो गलियों का चमकना
वो दिन में मस्ती वो रंगों की धूम होली आ गई है 
“”बुरा ना मनाओ होली है“” .

होली तो बस एक बहाना है
रंगों का ये त्यौहार तो है
आपस में दोस्ती और प्यार बढाने का ..
चलो सारे गिले शिकवे दूर कर के
 एक दुसरे को खूब रंग लगाते  हैं
मिलकर होली मानते हैं ..

पूनम का चाँद रंगों की डोली,
चाँद से उस की चांदनी बोली,
खुशियों से भर दे सबकी झोली,
मुबारक हो आप सब को खुशियों से भरी 
“होली हैप्पी होली”

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख पसंद आई होगी और ये भी पता चल गया होगा की होली क्यों मनाया जाता है? तो दोस्तों इस बार होली में अपने सेहत या दूसरों के सेहत के साथ खिलवाड़ ना करें और chemical रंगों की जगह naturals रंगों का इस्तेमाल करें और खूब मस्ती करें.

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