आ अब लौट चलें | हिंदी प्रेम गीत

आ अब लौट चलें – हिंदी प्रेम गीत

आ अब लौट चलें हिंदी प्रेमगीत
आ अब लौट चलें हिंदी प्रेमगीत

आ अब लौट चलें

संगणक-सी दिन गिनती जाऊं
गिन-गिन लागे ढेर
स्मृति-पेटिका रिक्त है फिर भी
देखो तो इक बेर

बन अभियन्ता आन पधारो
दरीचे करते बैन
सुनो जी ए जी
मेरे दूखन लागे नैन . . . . . !

हाथ में मेरे यह चलभाषी
बूझत है दिन-रात
व्यस्त बतावे राह तुम्हारी
पापी करता घात

किस-किससे बतियाये रहे तुम
कौन तुम्हारा चबैन
सुनो जी ए जी
संपर्क-सूची सुधारो निकतैन . . . . . !

द्रुतचालिनी मेरी साथिन
जैसे तुम मेरे प्राण
चतुष्पथ आरक्षी खड़ा है
खोया मेरा शिरस्त्राण

प्रियतम मिलना कैसे होवे
कैसे सुखी हों नैन
सुनो जी ए जी
वीथि-वीथि जनरव बेचैन . . . . . !

नदी किनारे नासिका जलती
उपवन जले सरीर
विषैली पवन विकास की धाती
विषैला धरती नीर

अंधी दौड़ के अंधे राही
करतब अंधे-चुभीते हैन
सुनो जी ए जी
किस विधि लौेटे वो सुख-चैन . . . . . !

पाती लिखूं तो भेजूं कैसे
मृत भये डाक और तार
लकवाग्रस्त हुआ जग सारा
कपोत दिए सब मार

भीजन का सुख कुठार ने छीना
चलता दिन और रैन
सुनो जी ए जी
बरस रहे अब नैन . . . . . !

आगे गहरी खाई दीखे
पीछे कुआँ जलहीन
श्वेत-श्याम नयन सुहावे
बहकावे चित्रपट रंगीन

आ अब लौट चलें रे साथी
मितभाषी मिठबैन
सुनो जी ए जी
अंतरताने सुभग दरसैन. . . . . !

प्रदूषण के कई प्रकार हैं यथा जलप्रदूषण, वायुप्रदूषण आदि-आदि। इनमें सर्वाधिक घातक है भाषाप्रदूषण। यह प्रेमगीत उन मतांधों को सटीक उत्तर है जो यह मानते हैं कि विदेशी भाषाओं की सहायता के बिना हम आपस में विचारों का आदानप्रदान भी नहीं कर सकते। आपके विचारों का स्वागत है।

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