आयुर्वेद की प्राणदायी क्षमता का अभिनदंन करती जनता

1000 ई के बाद से पहली बार आयुर्वेद को भारत की जनता ने हृदय से अपनाना आरम्भ किया है। प्राणों के संकट के भय से ही सही किन्तु आयुर्वेद पुनः एकबार भारत के लिए तारणहार की भूमिका में उभरकर सामने आया है। जनता हॉस्पिटल की ओर जाने से पूर्व आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन कर रही है। अधिकांश लोग स्वयम् को आयुर्वेद के सहारे स्वस्थ कर ले रहे हैं। आयुर्वेद इस कोरोना काल में लोगों का जीवन बचाने में सक्षम हो रहा है।

आयुर्वेद

आयुर्वेदिक औषधियों से लोग दो तीन दिन में ठीक हो जा रहे हैं। अनेक लोग जिन्होंने संक्रमण का अनुभव होते ही औषधि ले लिया, वो तो 24 घंटे में ही ठीक हो जा रहे हैं। तीन से चार खुराक में ही उनको लाभ हो जा रहा है। कुछ गंभीर रूप से ग्रस्त लोगों को भी पाँच दिन, एक सप्ताह में बहुत लाभ हो जा रहा है। निराश कोई भी नहीं हुआ। जिनको उचित औषधी और परामर्श समय से नहीं मिला उन मामलों में विफलता आयुर्वेद की नहीं उनकी आयुर्वेद तक पहुँच न होने की है।

लोगों को कोई जानकर मिला तो जनता उनसे उपचार पूछ रही है, और सलाह मान रही है। कोई वैद्य दिखा तो जनता उनसे सहायता ले रही है। कोई बीएएमएस है तो लोग उनके पास भी जा रहे हैं, सहायता ले रहे हैं। किंतु क्या जनता की इस भावना को सहयोग देने के लिए, जनता को ऐसे समय में आयुर्वेदिक सेवा देने के लिए वैद्य व विशेषज्ञ लोग तैयार हैं? देश में योग्य वैद्यों का बहुत अभाव है। वैद्यों की सँख्या बहुत कम है। देश की जनसँख्या बहुत बड़ी है और अच्छी जानकारी रखने वाले लोग बहुत कम हैं।

कई शहरों में आयुर्वेद की दवा ही नहीं मिल रही है। सिकंदराबाद के एक रोगी का उपचार कर रहा था, तो उनको पूरे शहर में औषधि कही मिली ही नहीं। फिर घरेलू दवाओं से उपचार करना पड़ा। मेरठ में जयमंगल रस नहीं मिला, मुरादाबाद से मँगवाना पड़ा। भागलपुर में दवा मिली ही नहीं, तो वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा।ऐसी औषधि के अभाव की समस्या अनेक स्थानों पर देखने को मिली। अर्थात् वैद्यों की कमी के साथ साथ अनेक स्थानों पर औषधियों का भी घोर अभाव है। अर्थात् आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कम्पनियां भी शायद इस समय के लिए तैयार नहीं थीं। अब वो सभी कम्पनियाँ भी कटिबद्ध हो जाएँ, अपना उत्पादन बढ़ाएँ, ऐसा उनसे भी निवेदन है।

यदि आपमें से सभी लोग या कुछ लोग आयुर्वेद सीखने की दिशा में कदम बढ़ाएँ तो देश का बड़ा उपकार होगा। आपका भी भला होगा। आपके निकट लोग, परिवार जन, कुटुंब के लोग, मित्रमंडली लाभान्वित होगी। लोगों की जीवनरक्षा में बड़ी सहायता होगी। लोग आपसे जुड़ेंगे। आपको समाज में भरपूर आदर मान भी मिलेगा। वैद्यों को आज भी समाज, गुरु और भगवान की तरह सम्मान करता है, बस आपकी योग्यता ऐसी हो कि एक भी व्यक्ति निराश वापस न जाए आपके पास से।

संकट में प्राण बचाने वाला भगवान जैसा ही महत्वपूर्ण होता है। जो संकट में काम आया, अधिकांश लोग उनको जीवन भर नहीं भूलते। कुछ गिनती के कृतघ्न लोग अपवाद होते हैं, जो लाभ लेकर चुपके से निकल लेते हैं। आशा है आप जनता की आशा के केन्द्रबिन्दू बनने की बात अवश्य सोचेंगे। या फिर अगली पीढ़ी को आयुर्वेद की शिक्षा लेने की प्रेरणा अवश्य देंगे। आशा करता हूँ भारत आयुर्वेद के स्वर्णिम युग में प्रवेश करेगा पुनः। आयुर्वेद आज भी सक्षम है आपको दो सौ वर्षों का जीवन देने में, आइए आयुर्वेद अपनाएँ। भारत को कोरोना मुक्त बनाएँ।

लेखक- मुरारी शरण शुक्ल।

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