मन की बात में नरेंद्र मोदी ने लोगों से पूछा सवाल – विश्व की नंबर एक तीरंदाज दीपिका को दी शुभकामनाएं

मन की बात 27 june 2021

मन की बात mann ki Baat में अक्सर आपके सवालों की झड़ी लग रहती है। परंतु इस बार नरेंद्र मोदी ने कुछ अलग ही सोचा और, टोक्यो ओलंपिक होने से पहले लोगों से पूछे कई सवाल जैसे ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय कौन थे? भारत ने किस खेल में ओलंपिक में सबसे अधिक पदक जीते हैं? ओलंपिक में सबसे अधिक पदक किस खिलाड़ी ने जीते हैं? इन सब सवालों को पूछने के बाद उन्होंने MyGov पर होने वाले ओलंपिक क्विज  के बारे में जानकारी दी और कहा कि आप वहां पर अपना जवाब देकर देकर आप कई पुरस्कार जीतेंगे। 

 उन्होंने यह भी कहा कि MyGov पर रोड टू टोक्यो क्विज में इस तरह के कई सवाल हैं। रोड टू टोक्यो क्विज में भाग लें, जानिए भारत ने पहले कैसा प्रदर्शन किया है, टोक्यो ओलंपिक के लिए अब हमारी तैयारी कैसी है, यह सब आप खुद जानें और दूसरों को भी बताएं।  उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में अवश्य भाग लें। 

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मिल्खा सिंह का पूरा परिवार खेलों को समर्पित रहा है

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने mann ki Baat में  दिग्गज एथलीट मिल्खा सिंह के बारे में कहा कि कोई कैसे भूल सकता है उन्हें। कुछ दिन पहले कोरोना ने उसे हमसे छीन लिया। जब वह अस्पताल में थे तो मुझे उनसे बात करने का मौका मिला। उनसे बात करते हुए मैंने उनसे आग्रह किया था। मैंने कहा था कि आपने 1964 के टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, इसलिए इस बार जब हमारे खिलाड़ी टोक्यो में ओलंपिक में जा रहे हैं, तो आपको हमारे एथलीटों का मनोबल बढ़ाना होगा, उन्हें अपने संदेश से प्रेरित करना होगा। वह खेलों के प्रति इतने प्रतिबद्ध और भावुक थे कि उन्होंने अपनी बीमारी के दौरान भी तुरंत अपनी सहमति दे दी। लेकिन दुर्भाग्य से, आज हमारे बीच नहीं है.  मुझे आज भी याद है कि वह 2014 में सूरत आए थे। हमने एक नाइट मैराथन का उद्घाटन किया था। उस समय मेरी उनसे जो बातचीत हुई थी, जो खेल-कूद के बारे में बातचीत हुई थी, उसने मुझे भी बहुत प्रेरित किया। हम सभी जानते हैं कि मिल्खा सिंह का पूरा परिवार खेलों को समर्पित रहा है…. भारत के गौरव को बढ़ा रहा है। जब टैलेंट, डेडिकेशन, डिटरमिनेशन और स्पोर्ट्समैन स्पिरिट एक साथ आते हैं तभी चैंपियन बनता है। हमारे देश में ज्यादातर खिलाड़ी छोटे शहरों और गांवों से आते हैं। टोक्यो जाने वाली हमारी टीम में भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका जीवन बहुत प्रेरणा देता है।

विश्व की नंबर एक तीरंदाज रहीं दीपिका को शुभकामनाएं दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपिका जो एकमात्र महिला तीरंदाज है उनके विषय में भी कहा कि नेहा की तरह दीपिका कुमारी जी का जीवन भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दीपिका के पिता एक ऑटो रिक्शा चलाते हैं और उनकी मां एक नर्स हैं, और अब देखिए, दीपिका इस समय टोक्यो ओलंपिक में भारत की एकमात्र महिला तीरंदाज हैं। विश्व की नंबर एक तीरंदाज रहीं दीपिका को शुभकामनाएं भी दी।

संघर्ष के बाद मिलती है सफलता

उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि, जीवन में हम जहाँ कहीं भी पहुँचते हैं, ज़मीन से इस संबंध को हम जिस भी ऊँचाई तक पहुँचाते हैं, हमें हमेशा अपनी जड़ों से बांधे रखता है। संघर्ष के बाद मिली सफलता की खुशी कुछ और ही है! टोक्यो जाने वाले हमारे खिलाड़ियों को बचपन में साधनों और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा, लेकिन वे दृढ़ रहे, और दृढ़ता के साथ टिके रहे। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की प्रियंका गोस्वामी जी का जीवन भी बहुत कुछ सिखाता है। प्रियंका के पिता बस कंडक्टर हैं। एक बच्चे के रूप में, प्रियंका ने पदक विजेताओं को दिए गए बैग को पसंद किया।  इसी आकर्षण ने उन्हें पहली बार रेस-वॉकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। अब, वह इसका एक बड़ा चैंपियन है।  साथ ही साथ उन्होंने बताया कि जेवलिन थ्रो में हिस्सा लेने वाले शिवपाल सिंह जी बनारस के रहने वाले हैं। शिवपालजी का पूरा परिवार इस खेल से जुड़ा है। उनके पिता, चाचा और भाई सभी भाला फेंक के विशेषज्ञ हैं। यह पारिवारिक परंपरा टोक्यो ओलंपिक में उनके काम आने वाली है। 

टोक्यो ओलंपिक में जाने वाले हमें प्रेरणा देने वाले हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ने बताया कि ओलंपिक में जाने वाले सभी खिलाड़ी हमें प्रेरणा देने वाले है  उन्होंने कहा कि चिराग शेट्टी और उनके साथी सात्विक साईराज का टोक्यो ओलंपिक के लिए जाने का उदाहरण भी प्रेरणादायक है। हाल ही में चिराग के नाना की कोरोना से मौत हो गई। पिछले साल सात्विक खुद भी कोरोना पॉजिटिव हुए थे। लेकिन, इन बाधाओं के बावजूद ये दोनों पुरुष डबल शटल प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की तैयारी में हैं। एक अन्य खिलाड़ी, भिवानी, हरियाणा के मनीष कौशिक के बारे में बताया कि  मनीष जी एक किसान परिवार से आते हैं। बचपन में खेतों में काम करते हुए मनीष को बॉक्सिंग का शौक हो गया था। आज उनका यही शौक उन्हें टोक्यो ले जा रहा है।

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 अंत में प्रधानमंत्री ने लोगों को बताया कि  ऐसे कई नाम हैं, लेकिन mann ki Baat में कहा की आज मैं कुछ ही नाम बता पाया हूं। टोक्यो जाने वाले प्रत्येक खिलाड़ी का अपना-अपना हिस्सा होता है .सभी को हमारी शुभकामनाएं. 

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